अगर ईश्वर ने ही सबको बनाया है ; हमें ,जानवरों को , घास-फूस , सब कुछ ; तो ये गरीबी ,बीमारियाँ ,मौत ...... भी उसी के कारण है . हम पैदा होते हैं ,बड़े होते हैं ,रोते हैं ,हँसते हैं ,चिल्लाते हैं ,नाचते हैं , इन सब में भी अगर God's will कहीं शामिल है तो जरूर कुछ गंभीर सवाल उठते हैं .
अगर भगवान ही ये सब चाहता है तो फिर इस सारी तिकड़म का मतलब क्या है ,हमारा अस्तित्व क्यों हैं ,हम क्या कर रहे हैं , कहाँ जाना चाहते हैं ? एक जवाब ये उठता है कि हमें विकल्प चुनने की आज़ादी है ;हम मजबूर नहीं हैं , हमारी खुद की will भी है जिसका अपना महत्व है .मैं कहना चाहता हूँ कि अगर हमारी ये will खुद ईश्वर की चाह का नतीजा हो , हमारे सामने के विकल्प और उनका चुना जाना सब पहले से ही नियंत्रित और तय हो ,और ये पूरी प्रक्रिया खुद ईश्वर ने सोच रखी हो तो फिर हमारा क्या महत्व बचता है ,हम केवल नियंत्रित किये जा रही सोच का परिणाम हैं और मुझे आभास हो रहा है कि हम केवल कठपुतली ही हैं .हम सब .... की जा रही चीजों के मज़े लेते हैं ,खुश होते हैं .हमें भरम इतना है कि ये गुलाम सोच हमें अपनी लगती है; पर ऐसा है नहीं ,अगर ईश्वर ही सब कुछ तय करता है तो .
अगर कोई कहता है कि हम मज़े ले तो रहे हैं ,हम अच्छा महसूस कर तो रहे हैं , हम इतना सब कुछ experience कर तो रहे हैं ,फिर क्या problem है .नहीं है ,problem बिलकुल नहीं है ,अगर सब कुछ ऐसा ही है तो ........पर सच ये है कि सब कुछ ऐसा नहीं है .आप गरीबों को देखिये ,जो घिनौनें हैं उन्हें देखिये ,जो गंदे हैं उन्हें देखिये ,जो मौत झेल रहे हैं उन्हें देखिये ,वो तो ऐसा नहीं सोचते , उन्हें God's will की या ऐसी किसी चीज़ की चिंता नहीं है ,वो भी आराम चाहते हैं . तो उनका क्या ? ये क्या उनके पुराने बुरे कामों का नतीजा है जो उन्हें भोगना पड़ रहा है ... अब आप मुझे बताइए कि ये बुरे काम किसकी will से हुए हैं, किसने हमें नियंत्रित किया हुआ है .... God ने.तो फिर वो क्यों कुछ लोगों को अपनी मनमर्जी से अच्छे काम सौंपता है और क्यों कुछ को घिसटना पड़ता है ,क्यों कुछ लोग पैदा होते ही "अच्छे" होते हैं और क्यों कुछ लोग सारी उमर छोटी- छोटी बातें भी नहीं समझ पाते हैं ?
अगर पुनर्जन्म को माना जाये (अगर आप ईश्वर को मान सकते हैं तो पुनर्जन्म भी मान सकते हैं ) तो भी सोचिये back trace करने पर कभी न कभी तो पहली बार ये सब हुआ होगा और तब भी God's will विल के कारण ही हुआ होगा ......तो फिर वही बात सामने आती है कि क्यों कुछ अच्छे हैं और क्यों कुछ गंदे हैं ?
सभी को अच्छा क्यों नहीं ,ये अंतर क्यों ; मैं जानता हूँ कि ये अंतर ही दुनिया को चला रहा है ,अगर कुछ बुरे नहीं होंगे तो कुछ अच्छे नहीं होंगे ,सब एक जैसे हो जायेंगे तो फिर क्या बचेगा . कुछ नहीं बचेगा . तो ठीक है ना न बचे .क्यों इस दुनिया के अस्तित्व की कीमत कुछ लोग भोगें, क्या जरूरत है ?
एक सोच ये हो सकती है कि जो आज बेचारे हैं ,कल वो खुश हों (अगर आप पुनर्जन्म मानते हैं तो ) और इस तरह अंत तक सभी के पक्ष में बराबर-बराबर कष्ट ,सुख आ जायें ; और इस दुनिया का अस्तित्व ठीक इसलिए हो कि हम सब कुछ खुद महसूस कर सकें, हमें खुद चीज़ों का अनुभव हो ,हम भी इस सबका एक हिस्सा बन सकें . ये सोच संतुष्टि देती है और आशा है कि ये ही सच हो.
Saturday, October 16, 2010
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